बागों में हम जबसे जाने लगे ,

बागों  में  हम  जबसे  जाने  लगे ,
तब से ही उनके ख़्वाब आने लगे ,
एकांत   में   बैठकर  के  धीरे  से ,
दीवाने होकर  ईलू-ईलू गाने लगे ।

प्रेम कुमार लविश

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