सीख देता हुआ मुक्तक

अपने आंगन में  खुशियों  की फुलवाड़ी  लगा लेनी चाहिए ,
महक उठे  सारा घर बार ऐसी खुशबू गुलों से आनी चाहिए ,
होनी  लगें जब  आपसी  रंजिशें  , पड़नी  लग  जायें  दरारें ,
बारिश-ए-मोहब्बत से उन्हें गुल-ए-गुलजार कर देनी चाहिए ।

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दिली ख्वाहिशें  दबाकर  जिम्मेदारियों को निभालो तुम ,
आशिक़ी से परहेज कर हकीकत से नजरें मिलालो तुम ,
छोड़   दो ' प्रेम ' फरेबी  हुस्न के  मायाजाल मेंं   फंसना ,
जाके पिताश्री का भार अपने बाजुओं पर उठालो तुम ।।

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