2 line shayri

नीरवता के आलिंगन में  जब होती है पायल की छनछनाहट ,
न जाने क्यों सहसा ही अधरों पर थिरक उठती है मुस्कुराहट ।

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ज़ख्मी कर देती हो बर्क़ - ए - निगाहों से देखकर ,
कोई फायदा नहीं है मखमल से हाथों को कष्ट देकर ।

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बारिश के बहाने वर्षा की याद न दिलाओ तो अच्छा है ,
शब्दों के द्वारा जख्मों पर नमक न छिड़को तो अच्छा है ।

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मेरे घर वाले मुझे न समझ सके , तो तुम्हारी क्या बिसात जो मुझे समझ पाओगे ,
चुगलखोरी  की  आदत गई नहीं अभी तुम्हारी , लगता है
खुराक लेकर ही जाओगे ।

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परिंदे भी अब चीख पुकार मचाने लगे हैं ,
दरख़्त जबसे धराशायी किये जाने लगे हैं ।

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तेरे साथ तो सारी दुनिया घूम लेंगे हम ,
मिलते ही एकांत तुझको चूम लेंगे हम ।

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मेरी नींदों को उड़ाने वाली सपनों की दुनिया में तुम
खोयी रहो ,
बुझा लूँ मैं अधरों की प्यास कुछ इस तरह तुम
सोयी रहो ।

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