कशिश और अनाइसा का प्रेम पत्र ( 5 )
------ कशिश द्वारा लिखा गया पत्र------
अनाइसा जी ,
मैं आपको झूठी प्रशंसा के भँवरजाल में नहीं फँसा रहा बल्कि आपके गुणों की प्रशंसा कर रहा हूँ । जिसके लिये आप सर्वथा योग्य हो । यदि आप मेरे जीवन में जीवनसंगिनी के रूप आयीं तो मैं अपना जीवन धन्य समझूँगा । जब से आपको देखा है तब से मुझे हर जगह आप ही आप नजर आती हो । पुस्तक पढ़ने बैठूँ तो पुस्तक में आपकी कोमल सी , प्यारी सी मुस्कान लिये छवि उभर आती है । मैं आपको भूल नहीं पा रहा हूँ । पता नहीं ऐसा क्यों हो रहा है मेरे साथ ? अब आप ही बताओ ।
अगर मेरी बात बुरी लगे तो पत्र को फाड़ देना या फिर जला देना , आगे आपकी इच्छा ।
----- कशिश
©️®️ प्रेम कुमार लविश
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